एयर इंडिया 171 दुर्घटना: आधिकारिक रिपोर्ट पर गौरव तनेजा ने क्या कहा ?


एयर इंडिया 171 दुर्घटना की आधिकारिक रिपोर्ट, जिसे एयर एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने जारी किया था, अब सवालों के घेरे में है। एक विश्लेषक, फ्लाइंग बीस्ट, ने इस रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया है और उनका मानना है कि इसमें कई विसंगतियां और “कमियां” मौजूद हैं। उनके विश्लेषण का मुख्य बिंदु यह है कि विमान के इंजन लिफ्ट-ऑफ के समय या उसके ठीक बाद विफल हो गए थे, जो रिपोर्ट के उस दावे से सीधा विरोधाभास रखता है कि इंजन विमान के 180 समुद्री मील की अधिकतम रिकॉर्ड की गई गति तक पहुंचने के बाद बंद किए गए थे।
आधिकारिक रिपोर्ट पर उठते महत्वपूर्ण प्रश्न
फ्लाइंग बीस्ट अपने सिद्धांत के समर्थन में कई पुख्ता तर्क पेश करते हैं:
* जड़ता और गति का विरोधाभास: उनका तर्क है कि यदि इंजन 180 समुद्री मील पर बंद कर दिए जाते, तो जड़ता के कारण विमान की गति घटने से पहले अस्थायी रूप से बढ़ जाती। यह तथ्य रिपोर्ट के उस दावे से मेल नहीं खाता कि 180 समुद्री मील ही अधिकतम गति थी।
* सिम्युलेटर प्रयोगों के परिणाम: उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट फ्लाइट सिमुलेटर पर एक प्रयोग किया, जिसमें यह दिखाया गया कि टेकऑफ के दौरान इंजन बंद करने पर विमान की गति पहले बढ़ती है और फिर घटती है। यह सीधे तौर पर रिपोर्ट के निष्कर्षों को चुनौती देता है।
* RAT परिनियोजन का समय: राम एयर टर्बाइन (RAT) की तैनाती और हाइड्रोलिक शक्ति की आपूर्ति के समय का विश्लेषण करते हुए, वे निष्कर्ष निकालते हैं कि इंजन की विफलता लिफ्ट-ऑफ पर ही हुई होगी ताकि RAT रिपोर्ट में बताए गए समय पर शक्ति की आपूर्ति कर सके।
* रोटेशन और लिफ्ट-ऑफ के बीच का समय: एयर इंडिया 171 के उड़ान डेटा की अन्य बोइंग 787 टेकऑफ के साथ तुलना करने पर, यह पता चलता है कि रोटेशन और लिफ्ट-ऑफ के बीच का 4-सेकंड का अंतराल यह दर्शाता है कि दोनों इंजन लिफ्ट-ऑफ के ठीक बाद तक सही ढंग से काम कर रहे थे।
* सामान्य रोटेशन का अवलोकन: सीसीटीवी फुटेज में टेकऑफ के दौरान विमान का सामान्य रोटेशन भी यह बताता है कि उस समय तक दोनों इंजन ठीक काम कर रहे थे।
AAIB की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल
फ्लाइंग बीस्ट ने AAIB की रिपोर्ट पर आधिकारिक हस्ताक्षरों की कमी और दुर्घटना के लिए पायलट त्रुटि का निहितार्थ देकर पीड़ितों के परिवारों के प्रति असंवेदनशीलता का भी आरोप लगाया है। वह यह भी बताते हैं कि AAIB ने कथित तौर पर अतीत में गंभीर घटनाओं को कम करके आंका है और डेटा को गलत तरीके से रिपोर्ट किया है, जिससे उनकी जांचों में विश्वास की कमी पैदा हुई है।
यांत्रिक मुद्दों की संभावित भूमिका
अंत में, उन्होंने बोइंग विमानों पर ईंधन शट-ऑफ वाल्व निरीक्षण के संबंध में विमानन अधिकारियों और एयरलाइंस के हालिया निर्देशों पर प्रकाश डाला। यह सुझाव देता है कि ये कार्रवाईयां केवल पायलट त्रुटि के बजाय संभावित यांत्रिक मुद्दे का संकेत हो सकती हैं।
यह गहन विश्लेषण एयर इंडिया 171 दुर्घटना की आधिकारिक रिपोर्ट पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है और इस दुखद घटना के पीछे के वास्तविक कारणों की और अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देता है। क्या यह समय है कि इस मामले को एक नए दृष्टिकोण से देखा जाए?

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