
अनंत अंबानी का ‘वनतारा’ (Vantara) प्रोजेक्ट, जो जानवरों के लिए एक विशाल बचाव और पुनर्वास केंद्र है, हाल ही में कई विवादों से घिरा हुआ है। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा औपचारिक रूप से शुरू किया गया था। हालांकि, अपनी भव्यता के बावजूद, यह प्रोजेक्ट जानवरों की तस्करी और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के कारण जांच के दायरे में आ गया है।
वनतारा की उत्पत्ति
इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2015-16 में ‘गौरी’ नामक एक हाथी के बचाव और पुनर्वास से प्रेरित होकर हुई थी, जिसने राधा कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट की स्थापना को जन्म दिया। बाद में इसे ग्रीन जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के साथ मिला दिया गया। यह केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थित है और इसका विस्तार 3,500 एकड़ में फैला हुआ है।
जानवरों की तस्करी के आरोप
विवाद तब गहराया जब जर्मन अखबार Süddeutsche Zeitung और वेनेजुएला की वेबसाइट Armando.info की रिपोर्ट में दावा किया गया कि वनतारा ने 32 अलग-अलग देशों से 39,000 जंगली जानवर आयात किए, जिनमें 11,000 लुप्तप्राय प्रजातियां शामिल थीं। इसके अलावा, Africa Geographics ने आरोप लगाया कि नौ गंभीर रूप से लुप्तप्राय चिंपैंजी को अवैध रूप से कांगो से वनतारा लाया गया था।
जानवरों के स्थानांतरण के बारे में चिंताएं
प्रोजेक्ट में कई हाथियों के स्थानांतरण को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की गई हैं। महाराष्ट्र के कोल्हापुर से महादेवी और त्रिपुरा से प्रतिमा जैसे हाथियों को इलाज के लिए वनतारा ले जाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, देश भर से 200 से अधिक हाथियों को इस केंद्र में लाया गया है, जिससे उनके कल्याण को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कार्बन क्रेडिट विवाद
एक और बड़ा आरोप यह है कि वनतारा का इस्तेमाल रिलायंस समूह के लिए कार्बन क्रेडिट उत्पन्न करने के लिए किया जा रहा है। यह आरोप लगाया गया है कि यह केंद्र सालाना 4,300 टन कार्बन क्रेडिट का उत्पादन कर सकता है, जिसका उपयोग रिलायंस के कार्बन उत्सर्जन को ऑफसेट करने या अन्य उद्योगों को बेचने के लिए किया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
इन सभी आरोपों के मद्देनजर, एक जनहित याचिका के जवाब में, सुप्रीम कोर्ट ने 26 अगस्त, 2025 को एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। एसआईटी को यह जांच करने का काम सौंपा गया है कि क्या वनतारा ने जानवरों के अधिग्रहण और स्थानांतरण के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है, क्या यह एक निजी चिड़ियाघर के रूप में काम कर रहा है, और क्या यह मनी लॉन्ड्रिंग या कार्बन क्रेडिट के दुरुपयोग में शामिल है। एसआईटी को अपनी रिपोर्ट 12 सितंबर, 2025 तक अदालत में पेश करनी है, जिसके बाद इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई होने की उम्मीद है।