
हरियाणा की 19 वर्षीय टीचर मनीषा की मौत का मामला एक उलझी हुई पहेली बन गया है, जहाँ हर नए खुलासे के साथ पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे हैं। यह एक ऐसा केस है जिसने जनता के आक्रोश को भड़का दिया है और प्रशासन को भी बैकफुट पर ला दिया है।
मामला: हत्या या आत्महत्या?11 अगस्त को मनीषा अपने घर से निकली थी और दो दिन बाद, 13 अगस्त को उसका शव खेत में मिला। शव की हालत देखकर शुरुआती तौर पर इसे निर्मम हत्या माना गया। गर्दन पर गहरा घाव था, जिससे लगा कि गला काटा गया है। इसी आधार पर पुलिस पर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया।लेकिन 18 अगस्त को, यानी शव मिलने के पाँच दिन बाद, इस मामले में एक नया मोड़ आया। पुलिस ने अचानक सुसाइड नोट मिलने की बात कही और दावा किया कि यह हत्या नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला है।पुलिस की जांच पर 6 बड़े सवालइस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं:
* FIR में देरी: मनीषा के लापता होने के बाद, परिवार ने तुरंत शिकायत की, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और FIR दर्ज करने में 24 घंटे की देरी की। परिवार का आरोप है कि अगर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की होती तो शायद मनीषा की जान बच सकती थी।
* सुसाइड नोट को छिपाना: अगर सुसाइड नोट 13 अगस्त को ही शव के पास मिल गया था, तो उसे पाँच दिनों तक क्यों छिपाकर रखा गया? पुलिस ने इस अहम सबूत को सार्वजनिक करने में इतनी देरी क्यों की? इसी वजह से जनता में आक्रोश फैला और उन्होंने इसे हत्या मान लिया।
* मुख्यमंत्री को अधूरी जानकारी: जब मामला बढ़ा और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद एसपी का तबादला हुआ, तब भी उन्हें सुसाइड नोट के बारे में जानकारी नहीं दी गई। यदि सीएम को यह तथ्य पता होता, तो क्या वे दोषियों पर कार्रवाई की बात करते?
* पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की अस्पष्टता: पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण और समय स्पष्ट नहीं था। इसने परिवार को और भी असंतुष्ट कर दिया, जिसके बाद दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाना पड़ा।
* अचानक यू-टर्न: पुलिस का पाँच दिन बाद अचानक सुसाइड थ्योरी पर आना लोगों को विश्वसनीय नहीं लग रहा। यह बदलाव पुलिस की जांच पर भरोसा कम कर रहा है।
* गायब मोबाइल: घटनास्थल से सुसाइड नोट और मोबाइल कवर तो मिला, लेकिन मनीषा का मोबाइल फोन अभी भी गायब है। यह एक महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है जो मौत के पीछे की वजह को उजागर कर सकता है। पुलिस इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही है।जन आक्रोश और आगे की राहइन सभी चूकों ने पुलिस पर जनता का भरोसा कम कर दिया है। ग्रामीण और परिवार के लोग पुलिस की सुसाइड थ्योरी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं और जब तक सच्चाई सामने नहीं आती, उन्होंने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया है।इस मामले में पुलिस को पारदर्शी तरीके से जांच करनी चाहिए और सभी सबूतों, खासकर गायब हुए मोबाइल फोन को जल्द से जल्द ढूंढना चाहिए। जब तक हर सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, यह मामला शांत नहीं होगा और न्याय की मांग जारी रहेगी।
